शादी का निमंत्रण
शादियों का दौर था, निमंत्रण चारों ओर था
एक निमंत्रण मेरा आया, जाने से खुद को रोक न पाया
झटपट हुआ तैयार मैं, सर्दी में नहाया नहीं यार मैं
धोया मुह लगाई क्रीम, दाढ़ी की थी हल्की ट्रीम
मैंने पहना कुर्ता पजामा, जो लाया था मेरा मामा
जूती पहनी कोल्हापुरी, लुक था मेरा अमरीश पूरी
जेब में मेरी था रुमाल, लग रहा था मैं कमाल
मुझसे बोला एक बच्चा, जच रहा तू भैया अच्छा
मैंने डाला थोड़ा डियो, बच्चा बोला भैया जियो
देखा शीशा बन गयी बात, सीधे पहुंचे हम बारात
जमकर बैंड बारात बाजे, बुढ़ा, बच्चा सब थे नाचे
मैंने भी कुछ झटके दिखाए, साथ अपने दोस्त नचाए
पहुंची बारात खुशियां छाई, जमकर हुई खातिर भाई
बरसे फूल बड़े गाए राग, स्वागत में था पान पराग
फिर जाकर खाने को देखा, 56 भोग था बड़ा अनोखा
पूडी, कचौड़ी, टिक्की भल्ला, सब पर मच गया हल्ला
मीठे मे थी बड़ी लड़ाई , रबड़ी, जलेबी सब थी बनाई
लड्डू, हलवा, बर्फी खाई, साथ में पी गए रसमलाई
इतने पर भी खाना खाया, लेकर प्लेट भोग लगाया
स्वाद स्वाद जमकर खाया, सतमोला ने खूब पचाया
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