तिरस्कार

लोग कहते है कुछ पाने के लिए कुछ खोना पड़ता है
जबकि अपनी खुशी के लिए तिरस्कार सहना पड़ता है


सपनों को टूटते देखा है, अपनों को छूटते देखा है 
तिरस्कार करती हुई आँख देखी है, होता अपमान देखा है 


मेरे अपने मेरे खिलाफ है क्या किया है मैंने
दुनिया को छोड़ अपने दिल को चुना है मैंने 


अपनी ख्वाहिश के चलते ये दौर भी देखा मैंने 
उम्मीद न थी उनसे भी खुद का तिरस्कार देखा मैंने


अपने जीवन में कभी मैंने पिता को याद न किया 
चंद दिनों मे उस पिता के लिए लोगों ने रुला दिया


यू नजरे चुराकर मुझसे रिश्ता तोड़ लिया 
बता तो दो मुझे ऐसा मैंने क्या गुनाह किया 


जो मेरे प्यार के खिलाफ खड़े है आँधी बनकर 
कर रहे है वही किसी की सिफारिश गाँधी बनकर 


प्रेम के कारण लगे है मुझसे रिश्ता तोड़ने मे सारे 
वही व्यस्त हैं किसी का प्रेम विवाह कराने मे सारे


मेरी खता क्या है यह कोई समझा दे मुझे
अपनी खुशी चाहना गलत है तो सजा दे मुझे

RK Vivaan Sharma 


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